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बुधवार, 10 फ़रवरी 2010

ओ साथी रे

अभी लिखने की इच्छा नहीं है.. अभी बेरोजगार हूँ तो ये आलम है.. जब रोज़गार पा जाऊंगा तो पता नहीं कैसे लिखूंगा..
खैर इस पोस्ट में केवल एक गाना पोस्ट कर रहा हूँ.. पसंद आये तो बताइयेगा..

गाना यहाँ से सुनिए : ओ साथी रे (प्रतीक माहेश्वरी)
बोल यहाँ पर देखें : ओ साथी रे (मुक़द्दर का सिकंदर)

आदाब
आपकी शुभकामनाओं के इंतज़ार में..
प्रतीक

1 टिप्पणी:

  1. बढ़िया गाया है..हमारा तो प्रिय गीत रहा है अपने जमाने का. :)

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