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बुधवार, 8 अप्रैल 2009

हाँ माँ तुम ही हो

यह छोटी सी कृति मेरी माँ के जन्मदिन पर लिख रहा हूँ...
बस अपने भावों को कुछ शब्द देने की कोशिश कर रहा हूँ...
बहुत मुश्किल है उस अन्दर छुपे अनंत भाव को शब्दों में बदलना...
बस एक कोशिश है...

सूरज की गर्मी और भव्यता हो तुम
आसमान की नीलाई और विशालता हो तुम

सागर की गहराई और अथाह हो तुम
ओंस की शीतलता और ठंडक हो तुम

धरती की सहनशीलता और सघनता हो तुम
पहाड़ की उंचाई और स्थिरता हो तुम

पंछी का कलरव और आज़ादी हो तुम
पेड़ों की छाँव और जीवन हो तुम

यह बता दो कौन नहीं हो तुम ?
यह बता दो किसमें नहीं हो तुम ?

जब हर ज़र्रे में हो तुम
जब हर बात हो तुम

तभी हमारी इबादत हो तुम
तभी हमारा सम्मान हो तुम

हाँ माँ,
तुम्हारे सामने ये मस्तक हैं नम..
तुम्हारे सामने ये मस्तक हैं नम..

आप मेरी माँ की कविताएँ यहाँ पढ़ सकते हैं |
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4 टिप्‍पणियां:

  1. सागर की गहराई और अथाह हो तुम
    ओंस की शीतलता और ठंडक हो तुम

    धरती की सहनशीलता और सघनता हो तुम
    पहाड़ की उंचाई और स्थिरता हो तुम
    bahut sunder rachana maa ke liye,maa aisi hi hoti hai,unko janam din ki dheron badhai

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  2. कहते हैं कि-

    ठंढ़क माँ के नाम की गरमी को शरमाए।
    ममता ले आँचल से धूप भी छनकर आए।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  3. बहुत बढिया लिखा आपने अपनी मां के लिए ... उन्‍हें जन्‍मदिन की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं।

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  4. Ye jo duniya hai-ye van hai kanton ka, tu phulwari hai - O maa, o maa...Birthday wishes to your Maa from my side also.

    Nice post Pratik...Keep rocking

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